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केदारनाथ की दुखद यात्रा

 आज जब हुआ सवेरा

मेरे मन को प्रसन्ता ने घेरा,

जाना था उतराखंड हमें आज

ताज़ी वादियों में करना था काज

 

 

मन ही मन खुश था मैं

हो रहा था तैयार ,

क्या लूँ ? क्या न लूँ ?

कर रहा था यही विचार

 

 

जून का महीना था

मौसम था गर्मी आज का,

सोचते - सोचते यह बात

कट गया रास्ता जर्नी का

 

 

असली मुश्किल तब आई

जब हो रही थी वर्षा,

डूब रहा था केदारनाथ

पूरा उतराखंड तरसा

 

 

खबर आई टी.वी.पर

कि बाढ़ आई केदारनाथ में,

सौ-सौ लोग मर चुके थे

एक ही रात मे

 

 

ठण्ड से मर रहे थे लोग

कुछ मरे थे भूख स

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