किसान's image
अभी अभी तो जागा था फिर से सूला दिया है उसे उम्मीदों के सहारे हमने ठोकरों से ही अपनी पेटे भर ली है क्या-कहे कि हमारे नसीब में भूख नहीं है हाथ में कटोरी तो है लेकिन खाने के लियें रोटी नहीं है
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