जो होता मैं बूँद उस पे बरस जाता

जो उसको ना छू सका उसे छू जाता

उसकी कत्थई आँखों में डूब जाता

उसकी सुर्ख लबो पर थम जाता

वो जो गाती तो मैं भी गाता

वो जो नाचती तो मैं भी झूम जाता

उसकी बदन पर मैं लोट जाता

जो वो सिहरती तो मैं उसे गुदगुदाता

उसकी केशो में मैं लिपट जाता

वो जो सुखाती तो मिट्टी की खुशबू की तरह फैल जाता

जो होता मैं बूँद उस पर बरस जाता