ज़िंदगीज़िंदगीरेत की उँगलियों सेबहती रही ज़िंदगी,हम समेटते रहेहम संवारते रहेपरहर पल , क्षण क्षण,यूँ हीखिसकतीं रही ज़िंदगीसिमटती रही ज़िंदगीबस हम इन्तज़ार करते रहेयूँ ही हाथ मलते रहेशशि
ज़िंदगीज़िंदगी
रेत की उँगलियों सेबहती रही ज़िंदगी,हम समेटते रहेहम संवारते रहेपरहर पल , क्षण क्षण,यूँ हीखिसकतीं रही ज़िंदगीसिमटती रही ज़िंदगीबस हम इन्तज़ार करते रहेयूँ ही हाथ मलते रहेशशि