मित्रमित्र वो है जोअगर गिर पड़ूँराह की ठोकरों सेबढ़ के आगे उठा ले मुझे,बिखर जो जाऊँ कभीतेज आधियों मेंसमेटे मुझे , सँवारे मुझे,टूट जाऊँ कभी मैं,लड़ के हालात सेबस अपने हाथों सेसहला देना मुझे
मित्रमित्र वो है जोअगर गिर पड़ूँराह की ठोकरों सेबढ़ के आगे उठा ले मुझे,
बिखर जो जाऊँ कभीतेज आधियों मेंसमेटे मुझे , सँवारे मुझे,
टूट जाऊँ कभी मैं,लड़ के हालात सेबस अपने हाथों सेसहला देना मुझे