हे मन
हे मन,
क्या कहने को तू आतुर ,
क्या सुनने को तू तत्पर,
खुद से ही प्रश्न करे ,
खुद ही उनके उतर खोजे
क्या पाने की तुझ मे होड़
जाना चाहे तू किस मोड़
दिन रात तू यूँही भटके,
किस पर तेरे पग है अटके,
तेरा जीवन है अनमोल,
हर शब्द , तू तोल के बोल,
क्षण भर तू व्यर्थ ना कर,
हर पल तू बस मस्ती कर,
क्यूँ जीते जी भरमायें
क्यूँ मरने से घबराये
जाने वो पल कब आ जाये
ना फिर अपनी करनी पर पछताये
(शशि सेतिया)


