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चूज़े का साहस

वाह रे क़ुदरत तेरी माया, 

अंडे में है जीवन पाया, 

कब तूने सांसे दे डाली ? 

कब है नन्हा दिल धडकाया? 

नन्ही चोंच व नन्ही आँखें, 

कब पंखों से मुझे सजाया?  

पल पल करते,पल पल करते 

हर पल यूँ ही सासें गिनते , 

किस दिन बाहर आ पाऊँ ? 

बस यूँ ही इन्तज़ार ही करते  

आखिर वो पल भी आया, 

अंडे से छुटकारा पाया, 

बाहर दुनिया रंग बिरंगी, 

देख देख फूला न समाया।  


दिन में सूरज की गरमी, 

शीतल

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