चल तू चल, चल तू चल
चल तू चल ,चल तू चल
ना कोई साथ दे को क्या,
ना कोई हाथ दे क्या ,
सफ़र तेरा, अकेले चल
जो गिर पड़े तो उठ के चल
खुद संभल, तू खुद संभल,
तेज़ ना तो धीमे चल,चल.....
वो अपने क्या छोड़ दे,
वो सपने क्या जो सोने दे,
समय तेरा , तेरा पल,चल.........
अपनी धड़कनों को सुन,
अपनी मंज़िलें तू चुन,
सफ़र तेरा मचल के चल, चल.....
ये ज़िंदगी की साँझ है,
जानूँ ना , क्या है होना कल,
यूँ व्यर्थ ना जाये निकल, चल....
शशि सेतिया


