आवारा जानवर

जो जानते हैं

सड़क पार करना,

हॉर्न समझकर रुकना,

खाली पेट सोना,

गर्मी में पानी खोजना,

ठंड से बचना,

जलती गर्मी से अनुकूलन बनाना

फिर भी हार जाते है

संवेदनहीनता से,

तेज गाड़ियों की रफ्तार से

पिसे हुए,

दबे हुए,

छत-विछत

मिल जाते हैं

हर रोज सड़कों के बीच

आवारा जानवर


नाक दबाये हम

ओहो कहते हम

निकल जाते हैं

हर रोज़

देर होती है

कहीं जाने की

किसी जीव को मार देना

बीच सड़क पर

बिना पश्चाताप के

छोड़ देना

क्या है?


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Shashi dwivedi

Assistant teacher