निकलते वक्त,
मां ने कहा –
जा रहा है?
कुछ छूटा तो नही?

मैं निस्पंदित था,
जुबां शिथिल थी,
सिर्फ इतना ही कह पाया,
तुम्म तो छूट रही ना।।

मां बेजुबां हो गई,
अश्रुधारा बहने लगी,
कोलाहल था चारों तरफ,
पर, भीतर सिर्फ़ सन्नाटा था।।

   –शशि