यूँ तो मैंने कहा बहुत कुछ
पर आज भी मुझको लिखना है,
प्रेम के आकाश में रात में फिर
तेरे चांद सा मुझको दिखना है।।
देखती हैं ये आंखें जैसे ही तुझको
मैं खुद को भूल जाता हूँ,
न जाने क्या-क्या करता हूँ और
होंठों पे खुशियां रमाता हूँ।।
ऐसे न होती जब मुलाकात तुझसे
तुझको याद कर मुस्कुराता हूँ,
हरकतें कुछ ऐसी भी होतीं मेरी
मैं खुद से बातें बनाता हूँ।।
कभी-कभी तो होता ऐसा
खुली आँखों से सपने देखता जैसे
और क्या-क्या है होता साथ मेरे
इस कलम से वो बातें मैं कहूँ कैसे?
जो दिल तेरा कहता है
वो दिल मेरा सुनता है,
जो आँखें तेरी कहती हैं
वो आँखें मेरी पढ़ती हैं।।
तू अनमोल प्रेयसी तोहफा मेरा
सबसे खूबसूरत जो मिला मुझको,
इतना भी न कर तू मेरे लिए ऐसा
मैं लौटा न पाऊँ कभी तुझको।।
फिर तुझसे वादा करता हूँ
संग-संग रहूँगा हर डगर पे तेरे,
और साथ-साथ ही चलेंगे हम
इस जीवन के हर फेरे।।
तू साथ मेरा जो देती है
तू ख्याल मेरा जो रखती है,
वो बातें मुझसे वो मासूमियत तेरी
वो खुबसूरती वो रूहानियत तेरी,
चलो कलम से कहता हूँ
हाँ तुझसे मोहब्बत करता हूँ!
वो मुझसे है जो ईश्क तेरा
बस यही तो है तोहफा मेरा..
और जो तू मेरी है ऐ प्रेयसी
बस यही तो है तोहफा मेरा।।