पल दो पल की मुलाकात ये..
अनगिनत अहसासों की बिसात ये
पल दो पल की मुलाकात ये!!
फिर प्रेयसी तेरे दीदार से
तेरी एक छुअन के गुलज़ार से
तेरे नयनों में भरे उस प्यार से
और उनमें भरे पुकार से,
इस कविता को मिली हयात ये
पल दो पल की मुलाकात ये!!
यूं तो इश्क है जवां अपना
है चाहत रग-रग में रवां अपना,
धड़कता दिल नहीं तेरी बातें हैं
यादों से हर सांस की मातें हैं..
एक शांत प्रफुल्लित समंदर में
जैसे गिरा एक कंकड़ हो,
और उठती लहरों की शुरुआत ये
पल दो पल की मुलाकात ये!!
कभी-कभी है मुझको लगता ऐसा
दिल मेरा है मुझको ठगता ऐसा..
गीत लिखने को बिठवा कर मुझको
तेरी राग सुनाता है,
धड़कता मुझमें ये नाम का है बस
रग-रग में तुझको रमाता है..
ये ज़िंदगी अब तिमिर रात्री नहीं
है खिलखिलाते सूर्य का प्रभात ये..
पल दो पल की मुलाकात ये!!
तू वो तोहफा अनमोल है मिला मुझको
जिसे पलकों पर बिठाकर रखता हूं,
करके व्यक्त आभार खुदा का
तेरा भी व्यक्त मैं करता हूं..
जो मंजिल की दूरी है ज्यादा अभी
शायद मोहब्बत की हो शिनाख्त ये
पल दो पल की मुलाकात ये!!
तेरी शैया पर रोज़ मैं आकर जैसे
मानो केशों को यूं सहलाता हूं,
चूम के तुझको माथे पर
सीने से अपने लगाता हूं..
कुछ बातें तुझसे होतीं हैं
कुछ छंद-गीत मैं सुनाता हूं,
फिर तू नींद में होती है
और मैं तुझपे सो जाता हूं..
ये मात्र मेरे हैं शब्द नहीं
दो सत्य दिलों के अहसास ये,
पल दो पल की मुलाकात ये!!