आओ आज मैं तुझको प्रेयसी तेरे पिया से मिला दूँ फिर, इस हिज्र की आग में डाल के पानी सीने से अपने लगा लूँ फिर। आओ आज मैं तुझको प्रेयसी..!! फिर तुझको लेकर चलूँ मैं उसी हसीन सफर पे आज, वो ईश्क की बातें जिसमें थीं और थे दो दिलों के राज़। उड़ा के नींदें रातों की दिन में ख्वाब जगा दूँ फिर, आओ आज मैं तुझको प्रेयसी तेरे पिया से मिला दूँ फिर।। ये मुश्किल वक्त जो बीत रहा मेरे हृदय का आंचल चीर रहा, बाहर मुस्कान हों खुशियों की पर अंदर बसा ये पीर रहा। आओ अपनी सज़ा की खातिर सिर तेरे पाँव लगा दूँ फिर, आओ आज मैं तुझको प्रेयसी तेरे पिया से मिला दूँ फिर।। ये कैसी इंतज़ार की घड़ियाँ हैं क्या धीरे बढ़ रही ये सुइयाँ हैं, जबकी आभास है तेरे इश्क का मुझको क्यूँ लगती यादों की झड़ियाँ हैं। एक आवाज़ पे तेरी आकर जैसे बाँहों के सुकून में रमा लूँ फिर, आओ आज मैं तुझको प्रेयसी तेरे पिया से मिला दूँ फिर।।