
शोर में डूबी दिन की रौशनी
जब थका मुझे यूँ जाती है,
मुख पे मेरे तेरे केशों की छटा
की याद बहुत ही आती है..!!
वो तिमिर में डूबे केश तेरे
बहते जैसे चांदनी में हवा,
श्यामल बादलों का घनत्व
चमचमाते सितारों में रवा..!!
वो बनके फूलों की पंकुड़ियाँ
मेरे हथेली पर उनका आना,
शीतल बरखा की बूंदो जैसी
छू कर बस फिसल जाना..!!
उन घने बादलों म
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