अदा है नग्म ऐ खुदा तुझकोमेरे शब्दों की स्याही से,ये निकलती आहें सिर्फ मेरी नहींहैं अश्क भी मेरी राही के। हाथों में लिए मुखड़ा उनका मुझे हमें दिलासा दिलाने दो, दबी जो दिल में आहें हैं मेरी कलम की राह में आने दो।।क्या खूब किस्मत पलटी तूनेक्या वक्त फेर दिखाया है,अग्नि से जलाता दिया कोईआज हाथ उसी में जलाया है। अब क्या होंगे करम तुम्हारे अब मुझे घाव सहलाने दो, दबी जो दिल में आहें हैं मेरी कलम की राह में आने दो।।दूरियों की घड़ी तो आनी थी हीतूने मर्म है और बढ़ा दिया,हँसते-खेलते चेहरों को तूनेऐ खुदा देख रुला दिया। निष्कासित खुशियों की सौगंध तुझे हमें खुशियाँ शेष निभाने दो, दबी जो दिल में आहें हैं मेरी कलम की राह में आने दो।।मुस्कुरा के कहना था अलविदामगर चोट पहले आ ही गई,बह रही थी जो शांत नदीउसके तूफान में नाव समा ही गई। है बात नहीं सिर्फ हृदय की ये सफलताओं के परिंदे उड़ाने दो, दबी जो दिल में आहें हैं मेरी कलम की राह में आने दो।।तुझे दिखा नहीं चेहरा प्रेयसी काहै पाक नूर बरसता जिससे,जिन शीशों से रूप सँवरता हैआज बिखरे हैं क्यों उनके हिस्से। 'गर मैं जब हूँ शीशा जहन में मुझे उनके गुणगान बखाने दो, दबी जो दिल में आहें हैं मेरी कलम की राह में आने दो।।है दरख्वास्त तुझसे इतनी खुदायाइम्तिहान की सीमा पार न कर,तेरा ही बनाया रिश्ता है प्यारउस पर ऐसे प्रहार ना कर। दे सीख बस तू सजा नहीं जरा हालातों को तरस खाने दो, दबी जो दिल में आहें हैं मेरी कलम की राह में आने दो।।