ना जाने ये वक़्त भी कैसे इतना बदल गया,अपनों से भी मज़ाक करते सोचना पड़ता है!


वक़्त की ही तो बात है, जो कल बिना कहे समझते थे,वो आज कहने पर भी ना समझते है!


वो भी क्या वक़्त था जहाँ हम बेबाक बाते किया करते थे, और एक रोज आज उन्हें नाम भी याद नहीं!


ना जाने ये वक़्त भी कैसे इतना बदल गया,अपनों से भी मज़ाक करते सोचना पड़ता है!