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कुछ यादे


आज कुछ लिखते लिखते,कुछ ऐसा लिख गए,की मानो सुकून तो तब आया ज़ब उसे मिटा सके,काश ये प्यार भी पेन्सिल जैसा होता जिसे हम अपने दिल से मिटा सकते।।

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