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मोहब्बत


अब कुछ इस कदर मोहब्बत करता हूं,की शीशे में भी तेरा ही अक्स देखता हूं..

अब लफ्ज़ नहीं मोहब्बत को बयां करने को,खुद में भी खुद से ज्यादा तुझे देखता हूं..

— शशांक
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