ना कुछ सुनना चाहता था, ना कुछ बोल पाया,

बस देखकर के मुस्कुराया..


एक अजीब सा सन्नाटा था उस पल में,

कुछ खोने का ग़म था उस कल में..


अब बातें उलझ चुकी थी,

राहें बदल चुकी थी..


नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ चला,

मंजिल की तालाश में आगे निकल पड़ा..


अब कोई मुसाफ़िर नहीं था साथ में,

बस कुछ यादें रह गई थी पास में..


- शशांक