रूप सलोना सनम का, देखत हो गया प्यार
अंखियाँ, अंखियों से मिलीं, दिल को मिला करार ll
करते हैं अब गुफ़्तगू, मन करे, मन से बात
चैन नहीं, दिन-रैन अब, ऐसे हैं हालात ll
प्यार चढ़ा परवान है, बेकाबू हुआ तन
दो रूहें, बेचैन हैं, करने को संगम ll
सोच लिया है अब सनम, दरिया करनी पार
जिस दरिया कुर्बान हुए, आशिक कई हजार ll
उल्फत हद से बड़ गई, प्यार हुआ बे-हद
सब जग बैरी हो गया, रहे न, हम निर्द्वंद ll
अब दुनिया पीछे पड़ी, चालें चले हजार
जीत गई दुनिया सुनो, सनम हुआ बेजार ll
छोड़ गया मेरा प्यार वो, छोड़ा गली, मकान
चला और के संग अब, करके मुझे बेज़ान ll
रंज नहीं तुझसे पिया, न खुद को कोई ग़म
अब मैं, किससे, क्या कहूँ ? जब किस्मत रही न संग ll
दोष भी नहीं दे रहा, तुमको, वो हमदम
"साजिश है ये खुदा की", मिल न सके जो हम ll
- - - - - - - - @ShashankMy.


