बेसब्र निगाहों को

है,इंतजार किसी का II

दिल को भी सुनना है

इज़हार किसी का II

 

कभी कहते कहते, वो

रुक गया था एक दिन II

बिना कुछ बोले, और

चल दिया,मेरे बिन II

 

तब से हर लम्हा,

यूँ,तिश्नगी में गुजरा है II

कि,मिले तो कह दूँ,उससे

अब जी नहीं सकता तेरे बिन II

 

वो रुका, न था

होंठ खामोश थे,उसके II

उसने कुछ कहा भी न था

मगर आंखों को,उसका

यूँ चुराना, कह रहा था II

 

आज जा रहा हूं, सनम

मगर आऊँगा एक दिन II

और हर वो बात कह दूँगा

“जो बात अधूरी है” II

 

तब से इंतजार कर रहे हैं 

इस कदर उसका,कि वो आए II

और “जो अधूरी सी बात" बाकी है

उसे इस दिल को सुनाए II

  

 

- - - - - - @ShashankMy.