आवारा बादल


आसमान में झूमता बादल 

पहाड़ों को है चूम रहा 

बदल कर रंग-बिरंगे लिबास 

जंगल-जंगल घूम रहा। 


नजर मिला रहा शजरो से

दरिया में है घुल रहा 

देख कर चेहरा दरिया में 

देखो कैसे फूल रहा। 


हलचल मचा रखी है फलक में 

अपनी ही गुमां में झूल रहा 

सूरज को मुट्ठी में कर 

कभी बंद तो कभी खुल रहा। 


रात ने फैलाई चादर 

सितारों को सुला रहा 

छुपा कर अपने आंचल में 

चांद को रुला रहा। 


सिर पे उठा रखा है आसमान 

परेशान सबको कर रहा 

कभी गरज कर कभी चमक कर

देखो कैसे अकड़ रहा। 


हवा ने जो मारी फूक

दूर तलक उड़ता रहा 

निकल गई पल में अकड़ 

उमड़ घुमड़ कर रोता रहा। 


थमी बारिश खिली धूप 

आसमां में छाई इंद्रधनुष 

सभी देखो हो रहे खुश

आवारा बादल देखो कैसे लटक रहा 

मानो फलक से मोती छलक रहा 

मानो फलक से मोती छलक रहा।