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झूठ से वफादारी

जानता हूं सच है क्या,

पर झूठ से वफादारी करता हूं मैं

रास्ता भी है, मंजिल भी है

पर खामोश खड़ा देखता हूं मैं

अकेले चलने की ताकत नहीं

पर काफिले में सबको हिम्मत देता हूं मैं

सुबह का इंतजार है, रात बड़ी लंबी है

पर आंखे खोल कर देखने से डरता हूं मैं

अपनी दास्तां जब उसने सुनाई

हाल मुझ जैसा ही था

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