फ़िराक ए ज़िन्दगी ने बैचेन मुझे रात रखा,कभी ख्वाहिशो को करवट से तो कभी तकिये से दबा के रखा।अवि शर्मा
फ़िराक ए ज़िन्दगी ने बैचेन मुझे रात रखा,
कभी ख्वाहिशो को करवट से तो कभी तकिये से दबा के रखा।
अवि शर्मा