उड़ने दो इनको
जिंदगी जीने का हक दो इनको
कर देंगी यह कुछ नया एक दिन
कर दिखाने का एक मौका तो दो इनको
स्त्री कौन है
वो जो दुर्गा का रूप है
वो जो काली का स्वरूप है
जरूरी नहीं
उसे अच्छा खाना बनाना आता हो
जरूरी नहीं
उसे घर के काम करना अच्छा लगता हो
जरूरी नहीं
उसके लंबे बाल हो
दीवार के चार कोनों में रहना
उसकी ऐसी एक पहचान हो
उसके छोटे बाल हो सकते हैं ।
उसके लड़को जैसे शौक हो सकते हैं ।
उसके नए नए मौज हो सकते हैं ।
उसके कई ख्वाब हो सकते हैं ।
उसे हक है,
अपने सपने खुद बुनने का
उसे हक है,
मेहनत करके उन्हें हासिल करने का
उसे हक है,
वो आसमान के कद तक पहुंँचने का
उसे हक है,
अपना जीवनसाथी खुद चुनने का
लड़ने का, मरने का, अपने देश के लिए, कुछ कर दिखाने का
और जो ना हो सका कभी
वह कर दिखाने का।।
- शानू विश्वकर्मा


