इधर, वेदज्ञान का अभिमान..

उधर, हाफिज़ होने का गुमां..

ज्ञान धरे रह गए, तलवारों ने छोड़ा म्यान।

रूधिर शरीर छोड़कर... थे रास्तों पर बह रहे...

जो बच गए थे रो रहे, क्यों बच गए? क्यों बच गए?

बिक रहे थे प्राण आज, बड़े ही सस्ते भाव में,

हाय, बस, थोड़ी सी सद्बुद्धि के अभाव में....