हे सृष्टिकर्त्ता,

तुम नर हो , या नारि ?

भाव-अभाव के , सहनशक्ति का

दिया प्रभाव कुछ ऐसा,

आता शत में, सहस्त्रांक

तुम लेते यदि परीक्षा,

कोख़, अंक, आँचल में..

लेकर सृष्टि,फिरती सारी,

हे सृष्टिकर्ता,

तुम नर हो , या नारि ?