देते श्रद्धांजलि तो उनको हम,जो कहीं शून्य में जाते हैं....

और लाख पुकारें हम कितने,बस मात्र स्वप्न में आते हैं....


मत दो श्रद्धांजलि शहीदों को,

ये मरे नहीं हैंं, अमर हुए....


देशभक्ति का कुंड सजा था,युद्ध की अग्नि धधक रही थी..

कर 'हविष्य' काया को अपने, तन मात्र का हवन किए...

ये मरे नहीं हैंं, अमर हुए....


जब एक सिपाही गिरता है, लौखंड में फिर भी देशभक्ति की,

कोटिशः हृदयों में जलता है,और हो अमृत पुनः-पुनः ,

ले जन्म सभी में पलता है...।


मत दो श्रद्धांजलि शहीदों को,

ये मरे नहीं हैं, अमर हुए.....



---शान्ता