हो जंग लड़ेंगे बहुत मगर..

बस 'जंग' नहीं है देशप्रेम,

इतर इसके कई काम पड़े, जो,

कर के हमें दिखाना है।।

सो रही देश की नैतिकता को, फिर से हमें जगाना है।।

युवा शक्ति की ताकत को,

तकनीक सीढिय़ों से चढ़कर,

मर्यादा-लक्षित हो समाज,

यह पाठ हमें बतलाना है।।

सो रही देश की नैतिकता को फिर से हमें जगाना है।।

हो रहा विकास है अर्निबाध्य,

पर भूल चुकी इस पीढी़ को,

है नहीं विकास बस तकनीकी,

विश्लेषण-आत्म बताना है।।

सो रही देश की नैतिकता को फिर से हमें जगाना है।।

होती ग़र गुण की बस पूजा,

बिन मर्यादा औ' नैतिकता

तब नहीं गजानन,दस-आनन का ,

सीस सकल पुजित होता।।

गिरती नैतिकता वालों में, माँग हलाहल त्रिपुरारी से,

आज हमें बँटवाना है

सो रही देश की नैतिकता को,फिर से हमें जगाना है।।


-- शान्ता