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अब आओ....


तब एक ही रावण भारी था,अब सोचो अपनी व्यथा हरी।।

सैकड़ों स्वच्छंद विचरते हैं,रक्षित कैसे कोई नारि?

अवतरित पुनः हो हे राघव!कि रहें निराभय हो सारी,

हम वानर -सेना बन जाएँ,जब तुम आओ हे त्रिपुरारी।।

— शान्ता
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