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वीरगति


तन पर त्रिवर्ण,मुख गंगाजल हो,और भृकुटि पर चंदन होहो शंखनाद, जयघोष अरु,गर्जन हो, सस्वर वंदन हो

न ध्वजा झुके,न तिथि रुके,न कोई रुदन न क्रंदन होजब वीर त्रिदिव प्रस्थान करे,तब भाल उठा अभिनंदन हो

:/शंकर

#JaiHind#जिल्दसाज़ी

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