तरुणाई जब मंत्र फूँक,चौसर पर पासा फेंकेगी

भीष्म सी बुद्धि कोने मे चुपचाप तमाशा देखेगी


वासना प्रेम का रण होगा,भावों का चीरहरण होगा

सब ज्ञान बनेगा गांधारी,कुछ केश खुलेंगे प्रण होगा


जब तक विवेक सारथी बनेगा,लाक्षागृह जल जाएगा

मन तो शकुनि मामा है, ये छलता है,छल जाएगा


◆शंकर

#जिल्दसाज़ी