मेरी लोरियाँ पढ़कर के पालें गर्भ माएँ

झूले पे बैठी लड़कियाँ, मेरे गीत गाएँ


लिख दूँ बिदाई सुन जिसे रो दें पिता सब

सोहर लिखूँ,सब गाँव मे थाली बजाएँ


मुझको पढ़कर कोई प्रेमी आँख झपके

मन छुए और प्रेमिका की आँख टपके


मेरी धुन गाकर कटें खेतों में फसलें

मेरी कजरी से सज़ें त्योहार सबके 


सबके लिए कुछ लिख के सोना चाहता हूँ

स्वार्थी हूँ..अमर होना चाहता हूँ


            :/शंकर