वो एक यायावर था,

दुनिया घूमने निकला था

किसी नए देश के किसी नाईट क्लब में,एक लड़की टकरा गई

'डेसी'

नाईट क्लब..


बातें हुईं,

थोड़ा सा इधर-उधर का स्पर्श भी

डेसी कई दिनों तक मिलती रही,काफी कुछ हुआ

एक सहचर ने पूछ हीं लिया

"कुछ चल रहा है क्या?"


यायावर हँसकर बोला

"यहाँ की लड़कियाँ ऐसी ही हैं,धरती पर जन्नत है ये नाईट क्लब"


देशाटन पूरा हुआ

कई दिनों की तृप्ति के बाद यायावर घर वापसी को तैयार था

डेसी को इंग्लिश नहीं आती थी, सो टूटी-फूटी भाषा में हाथ से इशारे करते हुए बोली


"सोवेनियर?"


उसने अपना बटुआ आगे बढ़ा दिया।

बटुए में डॉलर,पाउंड, यूरो और कुछ रुपयों का कॉकटेल पड़ा था।

अंदर से डर भी था कि,महँगा न पड़ जाये


डेसी ने कुछ नोट निकाले, लंबाई-चौड़ाई की तुलना की और दस रुपये का एक नोट चुन लिया।

अब उसकी जान में जान आई


डेसी ने फिर जोड़-तोड़ कर बोला

"साइन?

नंबर?"

अपने दस्तखत और नंबर,नोट पर लिखकर,उसने डेसी को थमा दिया।डेसी ने शर्ट की ऊपर की बटन खोली और नोट को तहाकर सहेज लिया


देर रात का समय था

विदा लेते वक़्त यायावर मुस्कुराया,

जानता था,डेसी नहीं समझेगी

धीरे से बोला,

"नासमझ!

पगली!"

उसके चेहरे पर सस्ते सौदे का सुकून था।


महीनों बाद फ़ोन पर चिड़िया की चहक सुनाई दी

उठाकर देखा

मैसेज था,

टूटी-फूटी इंग्लिश में


"आई नींव..वाट आई चोज़

~डेसी"