बंदूकें,
धर्म नही पूछतींजात भी नही देखतींवो तो चलाने वालेहाथ भी नही देखतीं
तर्कों,दलीलों की नही चलती
बंदूकें बहरी हैंसो वकीलों की नही चलती
स्वयं निर्णय लिखकरकलम तोड़ देती हैं
अखबारों,बुद्धिजीवियों के लिएहलफ़नामा छोड़ देती हैं
'नैनं छिदंति शस्त्राणि'
:/शंकर#जिल्दसाज़ी