आईना's image

आईना पोंछ रही थी,

उसका हाथ,और वो कपड़ा, दोनों ठहर गए


कई दिनों बाद आईने से धूल साफ की थी

या शायद,

ख़ुद को इतने क़रीब से कई दिनों बाद देखा


"क्या तुम सच में मुझसे इतना प्रेम करते हो?"

"हाँ, 

ख़ुद से भी ज़्यादा"


"ये प्रेम कभी कम तो नहीं होगा?"

"अंतिम समय तक नहीं"


"और मैं बूढ़ी हो गई, या सुंदर न रही तो?"

हँसकर बोली

"मेरा तुम्हारे प्रति प्रेम आत्मिक है, शारीरिक नहीं"


उँगलियों से दुपट्टा लपेटते हुए उसने धीमी सी मुस्कान छेड़ी थी


सब कुछ उसके मन में ताजा था,

पहले जैसा,


"हाँ,

प्रेम आज भी उतना ही है,

आज भी प्रेम से भीजी बातें होत

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