शरीर का शांत होना

बुत सा

आँखों का शांत होना

समाधि सा

केन्द्रबिन्दु का शून्य होना

आरंभ जैसा

या अंत के उस पार

इतनी खामोशी ब्रम्हांड के इसपार

और उस पार

वेग जारी हैं

करवटों के डोलते नावों का

उठते गिरते कोमल कठोर भावों का

सहसा ही उभरते, माथे पे

बिजली जैसी रेखाओं का

समर्थन और

समर्पण , जैसे माँओ का

और फिर शांत होना

कुछ भर सा देता हैं

शायद, कविताओं का होना

यही हैं ।