अल्फ़ाज़ दिल से-


कोई तो है ----------


कोई तो है जो रास्ते दिखा रहा है,

कोई तो है जो चलने का हौसला दे रहा है,

कोई तो है जो सब मस्लिहत समझा रहा है,


क्या वो खुदा है ?

क्या वो ईसा है ?

क्या वो शिव है ?

क्या वो नानक है ?

या वो इंसान है जो अपने रास्ते खुद बना रहा है


ये ब्रह्मन्ड, ये सृष्टि, ये संस्कृति, ये सभ्यता,

कोई तो है जो अपना काम बखुबी निभा रहा है,

या बस ये इंसान है जो अपने रास्ते खुद बना रहा है 


समझ सकते हो तो समझो, मज़हब नही सिखाता आपस मे बैर करना,

समझ सकते हो तो समझो, खुदा, ईसा, शिव या नानक नही बताता झगड़ना,

समझ सकते हो तो समझो, वो फ़िरोन है और है वो काफ़िर 

जिसने जिहाद से लेकर बलिदान तक का तर्जुमा गलत है दुनिया को समझाया


और तब भी न समझ सको तो बस ये कह देना

कि ये इंसान ही तो है जिसने खुद से है सब कुछ बनाया,

और जो ये भी ना कर सको तुम, तब ये सोचना 

कि क्या इंसान होने का फ़र्ज़ तुमने है बखुबी निभाया?? 

कि क्या इंसान होने का फ़र्ज़ तुमने है बखुबी निभया??


Shameena Khatoon ✍✍