जब नाव जल में छोड़ दी, तूफ़ान में ही मोड़ दी,
दे दी चुनौती सिंधु को,
फ़िर पार क्या, मझधार क्या।।
जब छोड़ सुख की कामना, आरंभ कर दी साधना
भगवान शंकर हो गए
फ़िर राख क्या श्रृंगार क्या।।
~अज्ञात


जब नाव जल में छोड़ दी, तूफ़ान में ही मोड़ दी,
दे दी चुनौती सिंधु को,
फ़िर पार क्या, मझधार क्या।।
जब छोड़ सुख की कामना, आरंभ कर दी साधना
भगवान शंकर हो गए
फ़िर राख क्या श्रृंगार क्या।।
~अज्ञात