जिन्हें प्रेम है संगीत से

कोयल के गीत से

पक्षियों के उड़ान से

जमीं से आसमान से

जिन्हें प्रेम है चांद की शीतलता से

उगते हुए सूर्य से

ढलते हुए शाम से

और वृक्ष के छाव से

जिन्हें प्रेम है इस मिट्टी से

हवाओं के चलने से

नदियों के लहरों से

सागर के किनारों से

जिन्हें प्रेम है सुकून से

वो इंसानों के प्रेम में भला क्या उलझेंगे???