मेरी ख़ामोशी और तुम्हारी चुप्पी,

मेरे जज़्बात और तुम्हारी समझदारी,

मेरा मोहब्बत और तुम्हारा इनकार,

मै और तुम,

सब,

राख़ हो जाएंगे

एक दिन,

और जब राख़ हो गए

तो कोई अंतर नहीं रह जाएगा।।