पुरानी यादों की किताब हैं,या तकिये का गिलाफ़ हैं, जिनपे नींद सुहानी आती है,औ हर रोज ,कोई नई कहानी आती है पतझड़ के मौसम में जब,टूटते हैं डाली से ,हवा में अटखेलियां करते ,आते हैं जमी पर, आँखों में चमक ,चेहरे पर मुस्कान लाते, इनके सुर्ख रंग से तो ,जिंदगी में असीम रंग भर जाते, चलती राहों में जब कभी ,ये पैरों के नीचे आते हैं , कुरकुरी सी आवाज ऐसे जैसे हवा में घुंगरू बज जाते हैं , खुद बूढ़े हो कर ये,हर मन मे बचपना लाते हैं, सूखे पत्ते ,मन को भावों से तर जाते हैं।