किताबो के पन्ने, बहुत कुछ बतलाते हैं, कुछ किस्से तो  इनमें ही दबे पाये जाते हैं। मुरझाई यादों को ताजा कर ,खुद सुख जाती है, हमको अतीत में ले जा,खुद भूल जाती है। इन पन्नो में  दास्तां पायी जाती है,औ इन पर ही तो नई ,पुरानी ,अजब ,अनोखी,जिंदगी की कहानियां बुनी जाती है। किताबोंके ये पन्ने जब मुड़ जाते हैं,कुछ यादें यूँ ही ,चेहरे पर अलबेली मुस्कान लाते हैं। तभी तो कहती हूं , पढ़ो , पढ़ो इन्हें,कि शायद जिंदगी से जा मिलो , पढ़ो कि शायद खुद से रुबरू हो सको , पढ़ो कि शायद मंजिलो को तुम्हारी तलाश हो, पढ़ो इन्हें,ताकि तुम खुद से मुखातिब हो सको,  कि शायद कुछ लम्हे जी सको । आँखों के उन आंसुओ की कीमत बहुत है ,यादों के संग जो आते हैं , वो लम्हे तो यूँ ही गुज़र जाते हैं, बस पन्नो में कहीं सिमट जाते हैं।