उम्मीदों की स्याही अभी सूखी नही है
चलो दिल के कागज़ को कुछ और रंगा जाए।
अहसासों की नमी अभी आँखों में है कहीं
चलो पलकों को कुछ और भिगोया जाए।
रुसवाई करके मेरी क्या मिलेगा उन्हें फिर भी
चलो उनको ही मशहूर बनाया जाए।
मेरी साफगोई से नाराज़ हैं कुछ दोस्त मेरे
चलो अब दुश्मनों को आज़माया जाए।