सोचती हूँ आखिर कौन है
जिसने मुझे कुछ नहीं सिखाया
माँ ने जन्म दिया
ममता का पाठ पढ़ाया
पिता ने संरक्षण दिया
कठिनाई से लड़ना सिखाया
अध्यापकों ने ज्ञान दिया
शिक्षा का महत्व समझाया
राह के पत्थरों ने मुझे
ठोकरों से संभलना सिखाया
रंग बदलते मौसम ने भी तो
दुनिया से रुबरु करवाया
पर कैसे भूल जाऊँ ...
वो पेड़, वो पौधे, धरती, ये आसमाँ
जिनके निश्छल समर्पण ने
ज़िन्दगी का सार समझाया।