मुझे मालूम नहीं इबादत का सबब
मेरी बातों में असर तेरे होने से है
मुक्कमल कुछ होता नहीं दुनिया में
दुआ मुक्कमल कबूल हो जाने से है
मिलोगे कभी तो पूछेंगे कुछ सवाल
फुरसत मगर तुम्हें कब ज़माने से है
मेरे आंसू मेरी पलकों में महफूज़ हैं
मुझे मतलब बस तेरे मुस्कुराने से है।