मन व्यथित.. लेखनी पीड़ित कैसे लिखे, किससे कहे जग के ये तिलिस्म मन को बहलाते नहीं खोखले रिश्ते समझ आते नहीं मायावी सी नगरी में आती जाती भीड़ में खो ही जाऊँ कहीं लेखनी संग नाता मेरा मुझसे छोड़ा जाता नहीं।