कुछ अधूरे ख़्वाबों के बीज ...
बो दो सूखे एहसासों की खाद में
प्यार की बरसात में शायद अंकुरित हो जाएं
वो अनकहे लफ्ज़ फूल बन खिल जाएं।
आने वाले पल ना जाने कौन सा मौसम लाएँ
आज के इन पलों को ऐसे यादगार बनाएं
जब न हो ताकत हाथ में कलम संभालने की
जब याददाश्त कुछ धुँधली सी हो जाए
कुछ इबारतें मेरी लिखी तुम्हारे लबों पर आ जाएं
शायद ये लिखना मेरा सफल उस दिन हो जाए।