कभी रूठी तो मुस्कुरा दी कभी ज़िन्दगी ऐसी ही कहानी बनी रही फूलों पर सजी हो शबनम की तरह आँखों में बस ऐसी ही नमी बनी रही चाहा था जाने क्या और क्या कह दिया बातों में अक्सर ऐसी ही उलझन बनी रही। दिल को रास आए , किया वही ताउम्र इस तरह उसकी मेहरबानी बनी रही।