जिसे मैं ढूँढती थी कहानियों और किस्सों में वो खुद मेरी कहानी का किरदार हो गया। आसमाँ देखने झुका अपना अक्स समंदर में समंदर का पानी सारा आसमानी हो गया। तूफान जो चला था बुझाने लौ दिये की जलता देख दिये का दिल रूमानी हो गया। जला रही थी दुनिया नफरतों से घर उसका देखकर, पत्थर का दिल भी पानी हो गया। वो महज़ एक पल का किस्सा था मगर तमाम उम्र उसके लिए एक कहानी हो गया।